अपने ही सरकार के खिलाफ कार्यकर्ता क्यों? फ्लाईएश पर सियासत तेज, क्या सत्ता पक्ष की बात नहीं सुन रहें जिम्मेदार अधिकारी जो सौपना पड़ेगा ज्ञापन…?

फ्लाईएश परिवहन पर सियासत गरम: अपनी ही सरकार के खिलाफ कार्यकर्ता मैदान में
जहां केंद्र और राज्य दोनों जगह डबल इंजन भाजपा की सरकार है, वहीं अब उसी पार्टी के कार्यकर्ता प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते नजर आ रहे हैं। भारतमाला परियोजना के तहत हो रहे फ्लाईएश परिवहन को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा एसडीएम और थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपने की तैयारी ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब सत्ता खुद भाजपा के हाथ में है, सांसद भी भाजपा का है और परियोजना केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है, तो फिर उसी पार्टी के कार्यकर्ता आखिर किसके खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं?

क्या यह अंदरूनी असंतोष का संकेत है या फिर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश?
सड़कों पर ओवरलोड और तेज रफ्तार फ्लाईएश वाहनों का मुद्दा लगातार गंभीर होता जा रहा है। आम जनता इन वाहनों से परेशान है, लेकिन प्रशासन की ढिलाई के बीच अब भाजपा कार्यकर्ताओं का ज्ञापन सौंपना कई सवाल खड़े कर रहा है। विपक्ष इसे “डबल इंजन सरकार की विफलता” बताकर मुद्दे को भुनाने में जुट गया है। भाजपा मंडल के कार्यकर्त्ता द्वारा प्रशासन पर उठाए गए सवालों के बाद अब पार्टी के ही कार्यकर्ता ज्ञापन सौंपने जा रहे हैं। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम कहीं न कहीं पार्टी की अंदरूनी खींचतान और स्थानीय स्तर पर समन्वय की कमी को उजागर करता है। जानकारों का कहना है कि ज्ञापन सौंपना एक तरह से “औपचारिक विरोध” है, जिससे कार्यकर्ता जनता के बीच सक्रिय दिखना चाहते हैं, जबकि असली जिम्मेदारी सरकार और उसके प्रतिनिधियों की ही बनती है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या भाजपा कार्यकर्ता खुद की ही सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं?
जनता के मुद्दे पर राजनीति हावी
फ्लाईएश गिरने से सड़कों पर फिसलन, धूल और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ रहा है। लेकिन इस गंभीर मुद्दे पर समाधान के बजाय अब सियासत हावी होती दिख रही है। स्थानीय लोग साफ कह रहे हैं कि उन्हें राजनीति नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए। और अगर नेताओं को भी ऐसे मामलों के लिए ज्ञापन सौपना पड़े तब आम आदमी और नेताओं में क्या फर्क रह जयेगा। अब देखना यह होगा कि भाजपा कार्यकर्ताओं का यह ज्ञापन प्रशासन को जगाने में सफल होता है या फिर यह पूरा मामला सिर्फ राजनीतिक दिखावे तक ही सीमित रह जाता है।




