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अंबुजा सीमेंट्स के कोल ब्लॉक के लिए वन भूमि परिवर्तन पर ग्रामीणों ने जताई कड़ी आपत्ति

कोल ब्लॉक परियोजना पर ग्राम सभाओं का विरोध, मंत्रालय को भेजा गया आपत्ति पत्र

छाल :- धरमजयगढ़ वन मंडल अंतर्गत पुरुंगा क्षेत्र में प्रस्तावित अंबुजा सीमेंट्स (अडानी) के भूमिगत कोल ब्लॉक परियोजना को लेकर स्थानीय ग्रामीणों ने तीव्र विरोध दर्ज कराया है। ग्राम पंचायत पुरुंगा, सामरसिंघा एवं तेंदुमुड़ी के निवासियों ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार को आपत्ति पत्र भेजकर वन भूमि परिवर्तन के प्रस्ताव को निरस्त करने की मांग की है।

ग्रामीणों के अनुसार कंपनी द्वारा कुल 869.025 हेक्टेयर क्षेत्र में से 621.331 हेक्टेयर वन भूमि को गैर-वन प्रयोजन हेतु परिवर्तित करने के लिए आवेदन किया गया है। यह आवेदन 25 जुलाई 2025 को प्रस्तुत किया गया था। प्रभावित गांवों के लोगों का कहना है कि यह क्षेत्र पेसा कानून और संविधान की पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है, जहां किसी भी खनन गतिविधि के लिए ग्राम सभा की अनुमति अनिवार्य है।

ग्रामीणों ने बताया कि संबंधित ग्राम सभाओं में इस प्रस्ताव के खिलाफ पहले ही प्रस्ताव पारित किए जा चुके हैं। तेंदुमुड़ी में 18 अक्टूबर 2025, सामरसिंघा में 19 अक्टूबर 2025 और पुरुंगा में 19 अक्टूबर 2025 को आयोजित बैठकों में सर्वसम्मति से खनन परियोजना का विरोध किया गया।

स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि प्रस्तावित क्षेत्र में लगभग 314 हेक्टेयर आरक्षित वन भूमि शामिल है, जो जैव विविधता से भरपूर है। यह क्षेत्र जंगली हाथियों सहित कई वन्यजीवों का स्थायी निवास स्थान है। यहां वर्षभर हाथियों की आवाजाही बनी रहती है और पर्याप्त जल स्रोत भी मौजूद हैं।

ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि भूमिगत खनन के दौरान भारी मशीनों, ड्रिलिंग और विस्फोट से उत्पन्न ध्वनि प्रदूषण एवं भूमि धंसान जैसी समस्याएं उत्पन्न होंगी, जिससे वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास प्रभावित होगा। इसके साथ ही मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ने का खतरा भी है।

इसके अलावा, ग्रामीणों का कहना है कि वन भूमि के परिवर्तन से पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ेगा, जल स्रोत प्रभावित होंगे और स्थानीय कृषि एवं आजीविका पर गंभीर असर पड़ेगा। आदिवासी समुदाय के पारंपरिक अधिकारों पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

ग्रामीणों ने मंत्रालय से मांग की है कि जनभावनाओं और संवैधानिक प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए इस प्रस्ताव को तत्काल निरस्त किया जाए और क्षेत्र की जैव विविधता तथा आदिवासी हितों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।

इस मामले को लेकर अब क्षेत्र में जनचर्चा तेज हो गई है और लोगों की नजरें मंत्रालय के आगामी निर्णय पर टिकी हुई हैं।

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