क्या है वजह जानिए, क्यों उठ रही दशरथ मांझी को भारत रत्न देने की मांग

कुछ दिनों से माउंटेन मैन के नाम से प्रसिद्ध दशरथ मांझी को बिहार में भारत रत्न देने का चर्चा तेज हो गया है ऐसे में देखना यह है कि इस मामले पर बिहार सरकार तथा केंद्र सरकार क्या करती है चलिए आपको बताते हैं कि आखिर क्यों माउंटेन मैन यानी दशरथ मांझी को भारत रत्न देने की चर्चा हो रही है दरअसल 1982 में दशरथ मांझी ने एक पहाड़ को तोड़ कर रास्ता का निर्माण किया था जिस पहाड़ को तोड़ने में लगभग 22 वर्षों का समय लगा था और उन्होंने इस पहाड़ को अकेले दम पर छेनी और हथौड़ी के मदद से काटकर एक रास्ता बनाया था जिस रास्ते का इस्तेमाल आज उस इलाके के लगभग 60 गांवों के द्वारा किया जाता है इस रास्ता को बनाने से जो दूरी पहले 12 घंटा में पैदल चलकर तय किया जाता था उस दूरी को महज अब आधे घंटे में तय किया जाता है

दशरथ मांझी ने क्यों तोड़ा पहाड़ ?

दशरथ मांझी की पत्नी फगुनिया उस पहाड़ से गिर कर मर जाती है जिसके कारण दशरथ मांझी कसम खाते हैं कि इस पहाड़ को जब तक तोड़ेंगे नहीं तब तक छोड़ेंगे नहीं

कैसे पहाड़ से गिर के मरी दशरथ मांझी की पत्नी फगुनिया ?

कहा जाता है कि उस वक्त दशरथ मांझी बहुत ही गरीब थे और अपने गरीबी के कारण वह अपना घर छोड़कर धनबाद के एक कोयला खान में काम करने लगे और कुछ दिनों बाद वह अपने घर वापस आते हैं और फागुनी नाम के एक लड़की से जिसे की प्यार से फगुनिया बुलाते थे शादी करते हैं 1 दिन की बात है जब वह पहाड़ के ऊपर लकड़ी काट रहे थे तब फगुनिया उनके लिए खाना और मटकी में पानी लेकर पहाड़ पर जा रही होती है उसी दौरान उनका पांव फिसलता है और पहाड़ के नीचे गिर जाती है जब काफी देर हो जाता है तब दशरथ मांझी उनको ढूंढने के लिए निकल परते हैं और पता चलता है कि वह काफी चोटिल है पैदल ही हॉस्पिटल ले जाने के लिए वहां से निकल पड़ते हैं पर हॉस्पिटल की दूरी लगभग 70 किलोमीटर होने के कारण घंटों लग जाता और उनका मौत रास्ते में ही हो जाता है

पहाड़ को तोड़ने में कितना टाइम लगा?

इस पहाड़ को तोड़ने में लगभग 22 वर्ष का वक्त लगा है जो कि 1960 से 1982 है प्यार की अदभुत गाथा आज उस गांव के साथ-साथ देश विदेश मे भी लोग जानते है आपको बता दें कि पहले गहलोत से वजीरगंज की दूरी 70 किलोमीटर तय करना होता था जो दूरी अब महज 10 किलोमीटर का रह गया है पहले जहां इस दूरी को तय करने में घंटों लग जाता था अब महज आधा घंटा में वजीरगंज लोग पहुंच जाते हैं दशरथ मांझी का जन्म 14 जनवरी 1934 में हुआ था 73 वर्ष की उम्र में 17 अगस्त 2007 को उनका निधन हो जाता है बिहार सरकार के द्वारा उनके नाम पर हॉस्पिटल सड़क तथा उस जगह पर एक पर्यटन स्थल बनाया गया है आमिर खान के द्वारा संचालित सत्यमेव जयते के दूसरे सीजन में पहला एपिसोड दशरथ मांझी के नाम पर समर्पित किया गया जिसमें उनके बेटे तथा उनकी बहू को बुलाया गया था आमिर खान के द्वारा उनके बेटे को आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया गया था। दशरथ मांझी के बेटे का कहना है की अमीर खान के द्वारा टाइम से सहायता नही करने के कारण उनके पत्नी का निधन हो गया यदि वह टाइम पे मदत करते तो इलाज करके उनको बचाया जा सकता था.

दशरथ मांझी के जीवन पर एक फिल्म भी बनाया गया है जिस फिल्म का नाम है मांझी द माउंटेन मैन जिसमें नवाज़ुद्दीन सिद्धकी ने बखूबी दशरथ मांझी का किरदार अदा किया है उनके निधन पर बिहार सरकार के द्वारा दशरथ मांझी को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। दशरथ मांझी और फगुनिया की प्यार की कहानी शाहजहां और मुमताज महल के प्यार की कहानी से कम नहीं है और दशरथ मांझी के द्वारा किए गए कार्य को सदियों तक याद किया जाएगा और कई लोग उनके इस काम से प्रेरणा लेते रहेंगे, दशरथ मांझी के द्वारा किए गए इसी असंभव सा लगने वाले काम को संभव बनाने के कारण आज उन को भारत रत्न देने की मांग उठ रही है

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